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CORONA के बाद बच्चों के SCHOOL लौटने से माहौल हुआ ख़ुशनुमा : सैयद शमायल अहमद 

पटना- बिहार सरकार के निर्देशानुसर बिहार के 38 जिलों में कक्षा 6 से कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों के लिए सभी निजी विद्यालयों के द्वार आधिकारिक तौर पर खोल दिए गए है। जिसके फलस्वरूप विद्यालयों का माहौल ख़ुशनुमा हो चला है। सूबे के सभी विद्यालयों में कोरोना महामारी से बचने के लिए सभी माणकों का पालन किया जा रहा है।
प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफ़ेयर एसोसीएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमायल अहमद ने सभी निजी विद्यालय संचालकों एवं अभिभावकों को शुभकामनाएँ देते हुए राज्य सरकार को धन्यवाद दिया है एवं साथ ही उन्होंने कहा की बिहार सरकार के द्वारा प्राइवट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफ़ेयर एसोसीएशन की आठ सूत्री माँगो में चार माँगों को लगभग पूर्ण कर दिया गया है परंतु अभी भी चार माँग पर संघर्ष जारी है जिसमें से अव्वल नम्बर पर निजी विद्यालयों का बिहार सरकार के शिक्षा विभाग पर शिक्षा के अधिकार के तहत पढ़ाए गए विद्यार्थियों का बकाया राशि है जिसपर माननीय मुख्यमंत्री महोदय के द्वारा संज्ञान लिया जाना बाक़ी है। साथ ही बिहार बोर्ड के द्वारा जबरन निजी विद्यालयों को परीक्षा सेंटर के तौर पर ले लिया जा रहा है जो कतयी भी सही नहीं है। पहले से ही एक वर्ष से निजी विद्यालयो की ख़स्ता हालात हो चुके है उसके बावजूद जब बिहार सरकार ने विद्यालयों को खोलने का आदेश दे दिया है तब बिहार बोर्ड के बारहवीं के परीक्षा के आड़ में विद्यालयों को संचालित करने से रोका जा रहा है जो न्यायसंगत नहीं है। पिछले कई दशकों से निजी विद्यालय संचालक बिहार बोर्ड के इस मनमानी रवैये से प्रताड़ित होते आ रहे है यदि इस बिंदु पर संज्ञान नहीं लिया गया तो सूबे के शिक्षा के मंदिर एवं ज्ञान बाँटने वाले संस्थान जब रहेंगे ही नहीं तब भारत वर्ष को कहा से इतने आई॰ए॰एस॰अधिकारी , आई॰पी॰एस॰अधिकारी  एवं आई॰आई॰टी॰ तथा मेडिकल के विद्यार्थी मिलेंगे।
बिहार सरकार को समझना ज़रूरी है की सूबे में शिक्षा का स्तर को बढ़ाने वाले यही निजी विद्यालय है और यदि इन विद्यालयों को यदि इसी तरह सरकारी परीक्षा करवाने के लिए लेते रहा जाएगा तो निजी विद्यालयों की भी गुणवत्ता अंधकार में चली जाएगी। जब बिहार बोर्ड इन परीक्षाओं को करवाने के लिए मोती रक़म पंजीकरण के नाम पर विद्यार्थीयों से वसूलती है तो क्या यह बिहार बोर्ड के अधिकारियों का दायित्व नहीं बनता है की उनके परीक्षा करवाने के लिए भवन की व्यवस्था आत्मनिर्भर हो कर करें। एक तरफ़ हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी आत्मनिर्भर होने को कह रहे है और दूसरी तरफ़ बिहार बोर्ड जैसे बड़े संस्थान निजी विद्यालयों को उजाड़ने के लिए जबरन अपने परीक्षा केंद्र जबरन दे कर निजी विद्यालयों के पठन पाठन को तहस नहस करने में लगी हुई है। सवाल यह उठता है की आख़िर बिहार बोर्ड पंजीकरण शुल्क ले कर करती क्या है क्यूँ की कई दशकों से किसी भी निजी विद्यालयों को परीक्षा केंद्र के नाम पर फूँटी कौड़ी नहीं मिलता है। अतः उपरोक्त बातों को देखते हुए बिहार राज्य के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी से निवेदन है की संज्ञान लेते हुए उचित कार्यवाही जल्द से जल्द करे।

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