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तेजस्वी यादव माला पहनने, स्‍वागत करवाने, जयकारा लगवाने के लिए मधुबनी गए थे।

पटना| बिहार विधान परिषद के सदस्य नीरज कुमार, संजय कुमार सिंह, जदयू प्रवक्‍ता अभिषे‍क झा और जदयू नेता मनीष कुमार सिंह ने जदयू प्रदेश कार्यालय में प्रेस को संबोधित किया। प्रेस को संबोधित करते हुए नीरज कुमार ने कहा कि तेजस्वी यादव मधुबनी पीड़ितों की सहायता करने नहीं, बल्कि माला पहनने, स्‍वागत करवाने, जयकारा लगवाने के लिए मधुबनी गए थे। जो बताता है कि तेजस्वी यादव किस तरह की राजनीति करते हैं। तेजस्वी के मधुबनी दौरे को राजनैतिक मातम यात्रा करार देते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को औकात बताना चाह रहे थे। दु:खदायी घटना में जाने के बाद तेजस्वी यादव घटना स्थल पर सबसे ऊँची कुर्सी पर बैठते हैं।
तेजस्वी यादव के ट्विट से यह साबित होती है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि जिसने वोट दिया उसका भी, जिसने वोट नहीं दिया उसका भी ख्याल रखते हैं। दरअसल, तेजस्वी यह बताना चाहते हैं कि पीड़ित परिवार ने उन्होंने वोट नहीं दिया था।
साथ ही उन्‍होंने कहा कि तेजस्वी ने जो आरोप लगाया है वह पूरी तरह से गलत है। मामले में 29 तारीख से ही गिरफतारी हो रही है और अब तक 19 लोगों की गिरफ्तारी हुई है, कुर्की जब्ती समय से की गई। इस दौरान तेजस्वी ने मुख्य अपराधियों को पुलिस द्वारा नेपाल छोड़े जाने के आरोपों का सबूत दिखाने की मांग की है। वही एस०एच०ओ० को भी सस्पेंड किया गया है। आगे भी यह कार्रवाई जारी रहेगी। यदि तेजस्वी को मौका मिले तो जिले में बंद व्यक्ति को गृह मंत्री बना दे और गंभीर आरोपियों को मंत्रिमंडल में शामिल कर देंगे।
संजय सिंह ने कहा कि मधुबनी में पीड़ित परिवार से मिलने के दौरान हमने कहा था कि 48 से 72 घंटे का समय दिजिए मुख्य आरोपी प्रवीण झा व अन्य आरोपी यदि पाताल में भी छुपा होगा तो उसे खोज निकाला जाएगा और हुआ भी यही। मधुबनी से आने के बाद सीएम नीतीश से मुलाकात हुई और इस घटना को लेकर अधिकारियों के साथ दो घंटे तक बातचीत हुई। इसी का नतीजा है कि पुलिस ने इस मामले पर कार्रवाई की और आरोपी को धड़ दबोचा। जबकि नेता प्रतिपक्ष कह रहे है कि उनसे डर कर पुलिस ने कार्रवाई की है। हकीकत यह है कि तेजस्वी यादव परिजनों से मिलने जाते है तो फोटो खिचवाते है और पटना लौट आते हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से सवाल किया कि सीवान में शहाबुद्दीन ने जिसका मर्डर किया उनके परिजनों से क्यों नहीं मिले? नवादा में रेप पीड़िता से जाकर क्यों नहीं मिले? जबकि इस मामले में उनके नेता राजवल्लभ यादव को न्यायालय ने सजा भी सुनायी थी।
आगे उन्‍होंने कहा कि सरकार पर आरोप लगाने वाले लोग जरा पुराने इतिहास को भी याद कर लें। लालू-राबड़ी के शासनकाल में 118 नरसंहार हुआ उस वक्त अपराध करने के बाद अपराधियों का पनाह स्थल एक अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास होता था। जहां अपराधियों को बचाया जाता था लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज में अपराधी सलाखों के पीछे होते है। नीतीश कुमार के शासन में अपराधी यदि पालात में भी रहेगा तब उसे ढुंढ़ निकाला जाएगा। मधुबनी हत्याकांड में भी यही हुआ मुख्य आरोपी प्रवीण झा सहित पांच अपराधियों को खोज निकाला गया जो आज सलाखों के पीछे है।

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