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राज्यस्तरीय जल-जीवन-हरियाली कार्यक्रम का आयोजन

बिहार सरकार द्वारा प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को जल-जीवन-हरियाली कार्यक्रम योजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए तथा आम जन को सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं से मानव जीवन एवं पर्यावरण पर दीर्घकालीन अनुकूल प्रभाव के बारे में जागरूकता हेतु कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसी कड़ी में आज कृषि विभाग द्वारा बामेती, पटना के सभागार में जल-जीवन-हरियाली कार्यक्रम का राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बिहार के विकास आयुक्त श्री आमिर सुवहानी मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।
विकास आयुक्त श्री आमिर सुवहानी ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि कृषि विभाग द्वारा जल-जीवन-हरियाली अभियान का कार्यान्वयन राज्य के पर्यावरण को प्रदूषण से मुक्त करने तथा वातावरण को स्वच्छ एवं स्वस्थ बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। बिहार में जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु इसे तृृतीय कृषि रोड़ मैप का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। राज्य के 13 जिलों यथा पटना, बक्सर, नालन्दा, भोजपुर, सारण, मुंगेर, भागलपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, खगड़िया, वैशाली एवं कटिहार में जैविक कोरिडोर की योजना कार्यान्वित की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत गठित किसान समूह के प्रत्येक किसान को 11,500.00 रू0/एकड़ की दर से जैविक खेती करने हेतु अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्ष 2020-21 में राज्य के कुल 21731 किसानों द्वारा 18061 एकड़ में जैविक खेती की जा रही है। किसानों को जैविक उपादान खरीदने हेतु सहायता के अतिरिक्त उन्हें लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उत्पादों की गुणवत्ता नियंत्रण हेतु आंतरिक नियंत्रण प्रणाली विकसित की गयी है, जिसमें जैविक खेती किसानों द्वारा की जाती है। परन्तु उसका डाॅक्युमेंटेशन सरकारी कर्मियों द्वारा किया जा रहा है। जैविक खेती हेतु गठित समूहों में से अबतक 113 समूहों को ब्1 प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है। इस योजना में आच्छादित जिलों के अतिरिक्त अन्य किसानों को भी सरकार द्वारा निःशुल्क प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इस योजना के अंतर्गत आच्छादित किसानों को जैविक खेती में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सिंचाई जल के समूचित उपयोग को बढावा देने के उद्देश्य से सूक्ष्म सिंचाई योजना का क्रियानवयन कृषि विभाग द्वारा किया जा रहा है। इस योजना अन्तर्गत राज्य के किसान 3 वर्ष पहले जहाँ छिट-पुट रूप ड्रिप सिंचाई पद्धति का प्रयोग कर रहे थें वहीं आज के तारीख में लगभग 5000 एकड़ में ड्रिप से सिंचाई प्रारंम्भ कर चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2019-20 एवं 2020-21 में क्रमशः 726 कृषकों द्वारा 1804.67 एकड़ एवं 729 कृषकों द्वारा 1909.32 एकड़ रकवा में ड्रिप सिंचाई पद्धति द्वारा सिंचित किया गया है। दक्षिणी बिहार के जिलों में बंजर भूमि को कृषि योग्य भूमि बनाने एवं वर्षा जल को संरक्षित कर सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने एवं भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए विभिन्न जल संचयन संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है। इसके तहत् मुख्यतः पक्का चेक डैम, साद अवरोधक बाँध, आहर एवं पईन का जीर्णोद्धार, सामुदायिक सिंचाई कूप का निर्माण, खेत की मेडबन्दी, प्रक्षेत्र तालाब, जल संग्रहण तालाब एवं स्टैगर्ड कन्टूर ट्रेंच का कार्य कराया जाता है। किसानों को फसल अवशेष जलाने के बदले उसका खेतों में ही प्रबंधन कर खाद्व के रूप में उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कई नवीनतम कृषि यंत्रों पर 75-80 प्रतिशत तक अनुदान की व्यवस्था है।
डाॅ0 एन0 सरवण कुमार, सचिव, कृषि ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा जल-जीवन-हरियाली अभियान की शुरूआत की गयी है। यह खुशी की बात है कि इस महीने का कार्यक्रम कृषि विभाग के द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से जल स्तर को संतुलित बनाकर रखना, जल को प्रदूषणमुक्त रखना, वृक्ष अच्छादन को बढ़ाना तथा नवीकरणीय उर्जा को बढ़ावा देना प्रमुख रूप से लक्षित किया गया है। ये सभी कार्यक्रम कृषि को आधुनिक बनाने तथा भविष्य की चुनौतियों को तैयार करने के लिए आवश्यक है। जल-जीवन-हरियाली अभियान का लाभुक कृषि विभाग है। साथ ही कृषि विभाग की जिम्मेवारी में कई कार्यक्रम भी हैं, जो इस अभियान की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है। 20 नवम्बर 2019 को राज्य में एक नयी शुरूआत की गयी जब माननीय मुख्यमंत्री जी के द्वारा जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम की शुरूआत 08 जिलों के लिए की गयी थी। जैसा मौसम वैसा फसल चक्र के सूत्र वाक्य के साथ माननीय मुख्यमंत्री जी के द्वारा देश और दुनिया को एक नया संदेश दिया गया। मुझे खुशी है कि पहले ही वर्ष में जलवायु अनुकूल कृषि योजना में शामिल किसानों ने इस योजना की सार्थकता को सही साबित किया है। आज इस अवसर पर सभी 08 जिला के जलवायु अनुकूल कृषि के चैम्पियन किसान, मुख्यालय के आयोजन में शामिल हुये हैं तथा इस योजना में शामिल 190 गाँव के किसान इस आयोजन के प्रत्यक्षदर्शी हो रहे हैं। पायलट योजना के आधार पर राज्य सरकार ने इस योजना को इस साल से सभी 38 जिलों में लागू कर दिया है। 38 जिलों के कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रक्षेत्र कीं 2.5 एकड़ जमीन में जलवायु अनुकूल कृषि का अनुसंधान कार्य शुरू किया गया। इस प्रक्षेत्र में अगले 50 वर्षों तक जलवायु अनुकूल कृषि का अनुसंधान कार्य किया जायेगा। हमने यह भी संकल्प किया है कि प्रत्येक वर्ष 1.5 लाख किसान को एक्सपोजर विजिट के माध्यम से प्रशिक्षित करेंगे। कम्बाईन हार्वेस्टर के उपयोग से फसल अवशेष जलाने की समस्या उत्पन्न हुयी है। फसल अवशेष के जलाने के कारण पर्यावरण का प्रदूषण एवं बहुमूल्य धान के पुआल की क्षति हो रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार के द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है। वर्ष 2019 में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान से परिचित कराने के लिए किसान चैपाल का आयोजन, रेडियो एवं टी.वी. के माध्यम से प्रचार-प्रसार, विद्यालयों में प्रार्थना सभा का आयोजन किया जा रहा है। फसल अवशेष प्रबंधन में उपयोगी कृषि यंत्रों पर 80 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान किया गया। कम्बाईन हार्वेस्टर को अनुदान योजना से हटाया गया है। फसल जलाते हुये चिन्ह्ति किये गये किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं से वंचित किया जा रहा है। 784 किसानों का कृषि विभाग के डी.बी.टी. का आई.डी. ब्लाॅक किया गया। रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से पर्यावरण को हो रही क्षति कम करने के लिए जैविक खेती शुरू किया गया। गंगा नदी के किनारे के 13 जिलों को मिलाकर एक जैविक काॅरिडोर की स्थापना की जा रही है। 175 जैविक किसान उत्पादक समूह निबंधित किये जा चुके हैं। 119 किसान उत्पादक समूहों को जैविक खेती का प्रमाण पत्र सी.-1 सर्टिफिकेट निर्गत किया जा चुका है। किसानों को 11500 रू॰ प्रति एकड़ की दर से तीन वर्षों तक अग्रिम अनुदान दिया जा रहा है। राज्य में ड्रीप तथा स्प्रिंकलर से सिंचाई के लिए किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। वर्षा जल के संग्रह के लिए एवं मिट्टी के अपरदन को रोकने के लिए किसानों को वाटर हार्वेस्टिंग टैंक के निर्माण, चेक डैम के निर्माण, साद अवरोधक डैम के निर्माण, कुँआ की खुदाई के लिए राज्य सरकार 90 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है।
इस कार्यक्रम में श्री रवि मनुभाई परमार, प्रधान सचिव ने लघु जल संसाधन विभाग के द्वारा जल-जीवन-हरियाली के लिए चल रही योजनाओं के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी। विशेषकर सतही सिंचाई यथा आहर-पईन एवं टैंक का पुनस्र्थापन तथा भूजल प्रबंधन में चैक डैम तथा जल संचयन योजनाओं के बारे में विस्तृत रूप से बताया।
श्री अरविन्द कुमार चैधरी, प्रधान सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार ने जल-जीवन-हरियाली कार्यक्रम के लिए चलाये जा रहे जागरूकता अभियान में जीविका दीदीयों की भूमिका के बारे में बताया।
श्री राजीव रौशन, मुख्य र्कायपालक पदाधिकारी, जल-जीवन-हरियाली ने वैश्विक मंच पर जलवायु परिवर्तन के लिए वैश्विक चिंतन के लिए समेकित रूप से ग्यारह अवयवों को चिंहित कर एक समेकित कार्यक्रम को क्रियान्वित करने वाला बिहार विश्व का पहला राज्य है।

श्री आदेश तितरमारे, कृषि निदेशक ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान का कार्यान्वयन राज्य के पर्यावरण को प्रदूषण से मुक्त करने तथा वातावरण को स्वच्छ एवं स्वस्थ बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा कई योजनाएँ इस अभियान में सम्मिलित किया गया है। जैविक खेती आज के समय की माँग है। जैविक खेती में उर्वरक एवं रसायनों का प्रयोग नहीं किया जाता है। इसके उत्पाद स्वास्थ्यवर्द्धक होते हैं। फसल अवशेष प्रबंधन किसानों को फसल अवशेष जलाने के बदले उसका खेत में ही प्रबंधन कर खाद के रूप में उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से फसल अवशेष प्रबंधन की योजना कार्यान्वित की जा रही है। इस योजना में हैप्पी सीडर, स्ट्रा बेलर-रैक रहित, रोटरी मल्चर, स्ट्रा रीपर, सुपर सीडर, स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (ैडै) एवं रीपर कम बाइन्डर ;4 ूीममसद्ध का उपयोग किया जाता है। इन उपकरणों पर 75ः की राशि अनुदान स्वरूप दी जाती है।
इस अवसर पर कृषि विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मचारीगण बड़ी संख्या में किसान भाई-बहन उपस्थित थे।

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