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प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राज्यपाल सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया

DELHI : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राज्यपाल सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। सम्मेलन में भारत के राष्ट्रपति भी उपस्थित थे और इसमें विभिन्न राज्यों के राज्यपाल और उपराज्यपाल, केंद्र और सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भाग लिया ।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा नीति और शिक्षा प्रणाली देश की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हालांकि शिक्षा की जिम्मेदारी केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर की सरकारों की है, लेकिन नीति निर्माण में उनका हस्तक्षेप कम होना चाहिए । उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति की प्रासंगिकता और व्यापकता तब बढ़ेगी जब अधिक से अधिक शिक्षक, अभिभावक और छात्र इससे जुड़ जाएंगे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का मसौदा देश के शहर और गांवों में रहने वाले लाखों लोगों और शिक्षा क्षेत्र से संबंधित लोगों से फीडबैक प्राप्त करने के बाद तैयार किया गया था । उन्होंने कहा कि अब शिक्षकों और शिक्षाविदों सहित सभी इस नीति के मालिक हैं ।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस नीति को सर्वांगीण रूप से स्वीकार किया जा रहा है और यह महसूस किया जा रहा है कि सुधारों को पिछली शिक्षा नीति में ही लागू किया जाना चाहिए था । उन्होंने इस बात की सराहना की कि इस नीति पर स्वस्थ बहस हो रही है और यह जरूरी है क्योंकि एनईपी न केवल शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए निर्देशित है बल्कि 21वीं सदी के भारत के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को नई दिशा देने पर भी निर्देशित है । उन्होंने कहा कि इस नीति का उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर या अटमानिरभर बनाना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य तेजी से बदलते परिदृश्य में युवाओं के भविष्य को तैयार करना है । उन्होंने कहा कि यह नीति देश के युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुसार ज्ञान और कौशल के साथ दोनों मोर्चों पर तैयार करने के लिए तैयार की गई थी।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति अध्ययन के बजाय सीखने पर केंद्रित है और पाठ्यक्रम से परे जाती है और महत्वपूर्ण सोच पर जोर देती है । उन्होंने कहा कि प्रक्रिया की तुलना में जुनून, व्यावहारिकता और प्रदर्शन पर अधिक जोर दिया जाता है । उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में सीखने के परिणाम और शिक्षक प्रशिक्षण और हर छात्र को सशक्त बनाने पर जोर दिया गया है ।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य 21वीं सदी में भारत को ज्ञान अर्थव्यवस्था बनाना है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत के शीर्ष अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के अपतटीय परिसरों के लिए भी अनुमति देती है जो प्रतिभा पलायन के मुद्दे का समाधान करेंगे ।

पीएम ने कहा कि देश में अब कोशिश है कि नई नीति को कैसे लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी आशंकाओं को दूर करने के लिए सभी हितधारकों के सुझावों को खुले दिमाग से सुना जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह शिक्षा नीति सरकार की शिक्षा नीति नहीं बल्कि देश की शिक्षा नीति है।

पीएम ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में तेजी से बदलते समय का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी क्षेत्रीय और सामाजिक असंतुलन को दूर करने में समान अवसर प्रदान कर रही है और इसका शिक्षा पर काफी प्रभाव पड़ रहा है ।

उन्होंने कहा कि प्रयास किए जा रहे हैं कि उच्च शिक्षा के हर पहलू-अकादमिक, तकनीकी, व्यावसायिक आदि को साइलो से बाहर निकाला जाए ।

प्रधानमंत्री ने एनईपी-2020 को अक्षरश लागू करने का आह्वान किया।

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