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अरिपन पटना की नाट्य प्रस्तुति “मलाहक टोल” का भव्य मंचन

सामंती समाज के विकृत मानसिकता का मार्मिक चित्रण है “मलाहक टोल”

पटना- देश मे बढ़ती बेरोजगारी के कारण गरीबी जैसी बीमारी से जहां लोग परेशान है वहीं अबला नारियों का शोषण और दोहन समाज आज भी हो रहा है। ग्रामीण समाज में बामुश्किल से गरीबों का गुजर-बसर हो रहा है जिसमें ठाकुर अथवा मालिकों के रहमोकरम पर छोटे और मजदूर समाज के लोगों का जीना एक मजबूरी सी हो गयी है। जहां पापी पेट के लिए गरीब महिलाओं को मालिक के ओछी मानसिकता का शिकार भी होना पड़ता है जिसे सामंती प्रथा का अवशेष कहा जा सकता है। ऐसी ही परिस्थिति में शुक्रवार को विद्यापति भवन पटना के मंच पर जी रहा था मैथिली नाटक “मलाहक टोल के कई कलाकार । जिन्होंने अपने अभिनय कौशल से प्रख्यात साहित्यकार राजकमल चौधरी के कहानी पर आधारित नाटक “मलाहक टोल” के चरित्र को जीवंत कर दिखाया।

नाटक ‘मलाहक टोल’ उसी समाज का चित्रण है जिस पर बहुत ही कम लिखा गया है। राजकमल चौधरी जिस समय इस कथा के माध्यम से सामाजिक व्यवस्था और स्थिति का चित्रण किये थे उस समय में और आज की स्थिती में कोई खास परिवर्तन नजर नही आता है, मात्र परिवर्तित हुआ भी है तो रहन-सहन और पहनावा।

प्रस्तुत नाटक के चरित्र महंथा और तिरपित मिसर जैसे चरित्र हर जगह आज भी हमारे समाज में मिल जाता है जो अपने दबंगई के बल पर गरीबों का खून चूसते रहता है साथ ही अबला नारी को अपने हवस का शिकार बनाता रहता है। कुछ क्रांतिकारी चरित्र तुरंता और केतकी जैसा भी मिल जाता है जो अन्याय के खिलाफ अपना आवाज उठाते रहता है और अपनी अस्मत बचाने के लिए चंडी का भी रूप धारण कर लेती है। कुल मिलाकर अरिपन पटना द्वारा प्रस्तुत नाटक ‘मलाहक टोल’ सामाजिक चेतना का दर्पण है जिसे निर्देशक रवीन्द्र बिहारी “राजू” ने मंच पर दर्शाया है । नाटक का नाट्य रूपांतरण – कुमार शैलेन्द्र और निर्देशन- रवीन्द्र बिहारी “राजू” का था.

मंच के कलाकार थे –

कमली- सोनी मिश्रा, पिरितिया- प्रियंका कुमारी, केतकी- रूचि रानी, तिरपित मिसर- अंतेश झा, चनरा- केशव कुमार, महंथा- बैजू झा, सुनरा- रामश्रेष्ठ पासवान, तुरंता-विनोद मिश्र, जोगिया- शिवम कुमार.

रिपोर्ट – अमलेश आनंद, पटना

About Amlesh Anand

My self Amlesh Anand, MA in Journalism from NOU Patna, and MA in Dramatics from LNMU Darbhanga. Theater was my passion and from there we got interested in journalism. so I associated with different organizations in print and electronic media for the last ten years, associated with reporting as a freelance journalist. The Mumbai correspondence associated with the ‘Fourth Pillar’ magazine 2001 film reporting, I start journalism journey permanently from Patna- ‘Sonbhadra Express’ daily newspaper. Contributed to the desk head in ‘Swaraj Khabar’ Hindi daily. In additional interest my favorite field was directing in which for 15 years he also directed many fiction shows in different production houses like Balaji Telefilms.

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