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बिहार को मक्का निर्यातक राज्य के रूप में विकसित किया जायेगा। अमरेन्द्र प्रताप सिंह

आज फेडरेशन ऑफ इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) द्वारा आयोजित 7वें इण्डिया मेज सम्मिट को संबोधित करते हुये बिहार कृषि मंत्री, श्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि बिहार में मक्का के क्षेत्र में असीम संभावनाएँ हैं। बिहार की सरकार राज्य में मक्का के उत्पादन एवं उत्पादकता को बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को उनके फसलों का अधिक से अधिक मूल्य दिलाने के लिए कृतसंकल्पित होकर कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि बिहार को मक्का निर्यातक राज्य के रूप में विकसित किया जाय।
इस अवसर पर बिहार के कृषि मंत्री ने सम्मिट में उपस्थित केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री पुरूषोŸाम भाई रूपाला से बिहार में मक्का का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से क्रय करने की अपील की जिसके आलोक में केन्द्रीय मंत्री ने आश्वस्त किया कि भारत सरकार इस पर निश्चित रूप से विचार करेगी।
श्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने फिक्की के सम्मिट में उपस्थित सभी उद्योगपतियों एवं संस्थानों से बिहार में मक्का आधारित उद्योग लगाने की अपील करते हुये कहा कि राज्य की सरकार बिहार में निवेश करने हेतु इच्छुक सभी उद्यमियों का स्वागत करेगी तथा उन्हें उद्योगों की स्थापना हेतु हर संभव मदद करेगी। राज्य की सरकार ने राज्य में कृषि के क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए अलग से बिहार कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति लाई है जिसमें पहली बार कैपिटल सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। केन्द्र की सरकार द्वारा बिहार को इथेनाॅल निर्माण के लिए भी स्वीकृति मिल गयी है।
इस अवसर पर श्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि मक्का दुनिया की सबसे महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसलों में से एक है और यह अधिकांश विकासशील देशों में खाद्य सुरक्षा में योगदान देता है। चावल और गेहूँ के बाद भारत में मक्का तीसरी सबसे महत्त्वपूर्ण फसल के रूप में उभर रहा है। इसका महत्त्व इस तथ्य में निहित है कि यह न केवल मानव भोजन और पशु आहार के लिए उपयोग किया जाता है, बल्कि यह मक्का स्टार्च उद्योग, मक्का तेल उत्पादन, बेबीकाॅर्न आदि के लिए भी व्यापक रूप से व्यवहार किया जाता है। तामिलनाडु के बाद बिहार मक्का का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है और यह राज्य रबी मक्का उत्पादन के लिए जाना जाता है। बिहार में जहाँ वर्ष 2005-06 में कुल मक्का का आच्छादन क्षेत्र 6.48 लाख हेक्टेयर तथा कुल उत्पादन 1.36 मिलियन मे॰ टन हुआ। बिहार में वर्ष 2016-17 में मक्का का रिकाॅर्ड उत्पादन दर्ज किया गया। उस वर्ष 7.21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का का आच्छादन हुआ था तथा इसका कुल उत्पादन 3.85 मिलियन मे॰ टन दर्ज किया गया। इस प्रकार, वर्ष 2005-06 की तुलना में वर्ष 2016-17 में लगभग तीन गुणा मक्का का उत्पादन हुआ। वर्ष 2016 में मक्का के सर्वश्रेष्ठ उत्पादन एवं उत्पादकता के लिए भारत सरकार द्वारा कृषि कर्मण पुरस्कार से राज्य को सम्मानित किया गया।
माननीय मंत्री ने कहा कि गंगा के उत्तर और कोसी के दोनों तरफ पड़ने वाले जिले यथा- पूर्णियाँ, कटिहार, भागलपुर, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया और समस्तीपुर मक्का बेल्ट के रूप में उभरा है। इन जिलों में बड़े और छोटे किसानों द्वारा 50 क्विंटल प्रति एकड़ के दर से मक्का की उत्पादकता प्राप्त

किया गया है, जो विश्व के सर्वश्रेष्ठ मक्का उत्पादक अमेरिका के क्षेत्रों मिडवेस्ट हार्टलैंड इलिनोइस, आयोवा और इंडियाना की तुलना में कहीं अधिक है। बिहार में कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले मक्का उत्पादित होते हैं। भारत में रबी मौसम में सबसे अधिक मक्का बिहार में उगाया जाता है। राज्य में रबी मक्का की कटाई के उपरान्त मई से जून महीने तक की कम अवधि में बाजार में मक्का बहुतायत होने के कारण इसके बाजार मूल्य में कमी आती है। जलवायु परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य में मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण मक्का की गुणवत्ता प्रभावित होता है। बिहार सरकार भंडारण की आधारभूत संरचना के विकास के लिए कटिबद्ध है तथा निरंतर भंडारण क्षमता को बढ़ाया जा रहा है। फिर भी, बिहार में मक्का के भंडारण हेतु आधारभूत संरचना की कमी है। राज्य में कुल उत्पादित मक्का का मात्र 8 प्रतिशत ही राज्य के अंदर उपयोग हो पाता है और अधिकांश उत्पादित मक्का राज्य के बाहर अन्य राज्यों में कच्चा माल के रूप में चला जाता है। सरकार राज्य के अन्दर मक्का आधारित उद्योगों की स्थापना की साथ-साथ आय बढ़ाने के लिए अन्य उपायों पर कार्य कर रही है।
राज्य सरकार के प्रयासों से द्वितीय कृषि रोड मैप के क्रियान्वयन के फलस्वरूप बिहार में कुक्कुट उद्योग में 15 से 20 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि हो रहा है। डेयरी उत्पादन सालाना 15 से 16 प्रतिशत के बीच बढ़ रहा है। मछली का बाजार, में बिहार तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए मक्का बीज उद्योग, इथेनॉल, मक्का तेल, फीड और स्टार्च उद्योग, जैव ईंधन, खाद्य आधारित उद्योग और रेडी-टू-यूज भोज्य पदार्थ यानी आटा, दलिया, सत्तू, टाॅफी, स्नैक्स आदि आधारित उद्योगों में निजी क्षेत्र के निवेश के लिए विशाल क्षमता में मौजूद है। इनके अलावा, राज्य में स्वीटकाॅर्न और बेबीकाॅर्न के निर्यात की काफी संभावनाएँ हैं।
इस सम्मिट में केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री आदरणीय श्री पुरूषोŸाम भाई रूपाला, नेफेड के प्रबंध निदेशक श्री संजीव कुमार चड्डा, फिक्की नेशनल एग्रीकल्चर कमिटि के चेयरमैन सह टैफे के ग्रुप प्रेसिडेन्ट श्री टी॰ आर॰ केशवन, फिक्की के महासचिव श्री दिलीप शेनाॅय, बायर क्राॅप साइंस के वाइस प्रेसिडेन्ट श्री सी॰ रविशंकर, एन.सी.डी॰एक्स के एम॰डी॰ श्री बिजय कुमार बेकटरमन जी, यस बैंक के फूड एण्ड एग्रीबिजनेस के हेड श्री संजय बुप्पुलरी, कोरटेवा एग्रीसाईंस के निदेशक श्री गुरदीप भठल सहित काफी संख्या में देश के जाने-माने उद्योगपति एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

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