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कृषि मंत्री ने बिहार राज्य बीज निगम एवं पौधा संरक्षण का किया समीक्षा

पटना- मंगलवार को कृषि मंत्री, सहकारिता एवं गन्ना उद्योग विभाग, अमरेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा  विकास भवन, नया सचिवालय, पटना अवस्थित कृषि विभाग के सभागार में बिहार राज्य बीज निगम (बी०आर०बी०एन०) एवं पौधा संरक्षण संभाग की समीक्षा की गयी। श्री आदेश तितरमारे, कृषि निदेषक-सह-प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य बीज निगम द्वारा बिहार राज्य बीज निगम की स्थापना, उद्देश्य से लेकर अभी तक की अद्यतन स्थिति से संबंधित पावर प्वाईंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तुतीकरण किया गया, जबकि पौधा संरक्षण संभाग का प्रस्तुतीकरण डॉ० प्रमोद कुमार, संयुक्त निदेशक, पौघा संरक्षण ने किया।

कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य के किसानों को जलवायु परिवेश में उत्पादित गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 1977 में बिहार राज्य बीज निगम की स्थापना की गई थी। वर्ष 1999 से वर्ष 2006 तक निगम के घाटे में रहने के कारण निगम बंद रहा। पुनः वर्ष 2006 में निगम को पुनर्जीवित किया गया, तब से अब तक निगम के बीज उत्पादन, प्रसंस्करण एवं वितरण क्षमता में लगातार विस्तार हो रहा है। वर्ष 2018 में निगम को राज्य के विभागीय योजनाओं में बीजों की आपूर्त्ति करने हेतु नोडल एजेंसी के रूप में प्राधिकृत किया गया। निगम द्वारा किसानों को बीजों की उपलब्धता से संबंधित ऑन-लाईन सीड डिलिवरी मेकानिज्म मॉडल को विकसित किया गया है, जिसमें किसान ऑन-लाईन बीज प्राप्त करने हेतु आवेदन कर सकते हैं। आवेदक किसानों को कृषि समन्वयक विभागीय लक्ष्य के अंतर्गत चयन कर जिला कृषि पदाधिकारी को ऑन-लाईन अग्रसारण करते हैं। जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा अनुमोदन के पश्चात् चयनित किसानों के रजिस्टर्ड मोबाईल पर एक ओ०टी०पी० जाता है, जिसे किसान निगम के प्राधिकृत डीलर को देकर अनुदानित दर पर बीज प्राप्त करते हैं एवं प्राप्त बीज से संबंधित कम्प्यूटर जेनरेटेड बिल प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि निगम द्वारा बीज उत्पादन में ज्यादा-से-ज्यादा किसानों को सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु मिशन 4.0 की शुरूआत की गई है, जिसमें रबी वर्ष 2020-21 से दलहन, गेहूँ, धान के अतिरिक्त संकर मक्का एवं सब्जी के उत्पादन को शामिल कर बीज उत्पादन प्रारम्भ किया गया है। निगम द्वारा क्यू०आर० कोड विपणन किये जाने वाले बीज के बोरे पर लगाने की शुरूआत संभवतः देश में पहली बार किया जा रहा है। क्यू०आर० कोड के माध्यम से बीजों की पूरी वंशावली की जानकारी स्कैन कर प्राप्त की जा सकती है। क्यू०आर० कोड में बीज उत्पादन के प्रारम्भिक चरण से लेकर प्रसंस्करण, पैकिंग तक की सभी जानकारी रहती है। बीज प्रभेद, पैदा करने वाले किसान का नाम, निगम में बीज इनटेक की तिथि, प्रसंस्करण तिथि, बीज प्रमाणीकरण की जानकारी आदि सभी सूचना समाहित रहती है। वर्तमान में निगम द्वारा स्वयं उत्पादित बीजों के अतिरिक्त आवश्यकता को देखते हुए अन्य एजेंसियों से बीज का क्रय किया जा रहा है। उसके लिए रजिस्टर्ड प्रोड्यूसर सप्लायर (आर०पी०एस०) के माध्यम से 07 एजेंसियों को पारदर्शी रूप से तीन वर्षों के लिए निबंधित किया गया है। जिसमें एन०एस०सी०, टी०डी०सी०, कृभको, एच०आई०एल०, के०भी०एस०एस०एल०, महालक्ष्मी सीड्स कॉरपोरेशन एवं नाकॉफ शामिल है। वर्तमान में निगम की प्रसंस्करण क्षमता 5.30 लाख क्विंटल है, जिसे बढ़ाकर इस वर्ष 08 लाख क्विंटल करने का प्रयास किया जा रहा है,। इसके अतिरिक्त एन०एस०सी० के माध्यम से 30 जिलों में 32 प्रसंस्करण इकाई-सह-गोदाम निर्माण का कार्य प्रक्रियाधीन है। रबी 2020-21 में राज्य के किसानों को दलहन, गेहूँ एवं तेलहन के कुल 2,53,617.77 क्विंटल बीज 4,83,623 किसानों के बीच निगम द्वारा विकसित ऑन-लाईन सीड डिलिवरी मेकानिज्म के माध्यम से किया गया है, जिसमें 70,841 किसानों को बीजों का होम डिलीवरी किया गया है। बीजों की उपलब्धता प्रखण्ड स्तर पर सुनिश्चित करने हेतु निगम द्वारा 457 डिलरों को प्राधिकृत किया गया है एवं आवेदन प्राप्त कर इसमें सतत् बढ़ोतरी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बी०आर०बी०एन० अच्छा कार्य कर रहा है, इसे और सशक्त करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि पौधा संरक्षण संभाग द्वारा विगत वर्ष में फॉल आर्मी वर्म एवं टिड्डियों के आक्रमण पर नियंत्रण किया गया है, जो सराहनीय है। पौधा संरक्षण योजना का मुख्य कार्य कीट-व्याधि सर्वेक्षण करना है एवं कीटों की आर्थिक क्षति तल के ऊपर जाने पर आई०पी०एम० आधारित प्रबंधन कृषकों को बतलाना है। पौधा संरक्षण योजना के अंतर्गत प्रत्येक जिला में 04-04 आई०पी०एम० आधारित कुल 152 किसान पाठशाला चलाया जा रहा है एवं टाल के कुल 06 जिलों में अतिरिक्त दलहन फसल पर कृषकों को जागरूक करने के लिए कुल 116 किसान पाठशाला चलाया जा रहा है। राज्य भर में कीटनाशी गुणवत्ता बनाये रखने के लिए 920 रसायनिक बीज नमूनों की जाँच का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, 250 जैव कीटनाशी का भी नमूना हैदराबाद प्रयोगशाला को भेजा जाना है। टाल क्षेत्र में कीट नियंत्रण हेतु 50 प्रतिशत अनुदान पर कीटनाशी भी कृषकों को उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पौधा संरक्षण संभाग में कुल 1509 पद स्वीकृत है, जिसमें अभी मात्र 334 पदाधिकारी एवं कर्मी ही कार्यरत है। इस तरह 1175 पदाधिकारी एवं कर्मी का पद रिक्त है। माननीय मंत्री ने पौधा संरक्षण संभाग के इन रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारम्भ करने का निदेश दिया।
इस समीक्षात्मक बैठक में श्री अनिल कुमार, माननीय मंत्री के आप्त सचिव, श्री रवीन्द्र कुमार वर्मा, प्रसंस्करण प्रमुख, बी०आर०बी०एन०, श्री राजेन्द्र कुमार वर्मा, विपणन प्रमुख, बी०आर०बी०एन०, श्री सुनिल कुमार अजय, उप निदेशक, पौधा संरक्षण, श्री संजय चन्द्र, निदेशक प्रशासन, बी०आर०बी०एन० सहित अन्य विभागीय पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

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