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शपथ ग्रहण के दिन भी हुआ डोनाल्‍ड ट्रंप का विरोध, कैसे सुधरेगी स्थिति?

वाशिंगटन : विश्‍व के सबसे शक्तिशाली व्‍यक्ति डोनाल्‍ड ट्रंप को अपने शपथ ग्रहण के दिन भी विरोध का सामना करना पड़ा. ट्रंप ने 20 जनवरी को अमेरिका के नये राष्‍ट्रपति के रूप में शपथ ली. इस दौरान अमेरिका के कई हिस्‍सों में विरोध प्रदर्शनों का दौर चला. कई जगहों से पुलिस ने सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया. वहीं ट्रंप के बोल अभी भी उनके विरोधियों को उकसा रहे हैं. प्रवासियों और मुसलमानों पर ट्रंप के तेवर अभी भी पुराने ही नजर आ रहे हैं. अमेरिका के अपने 45वें राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रम्प का स्वागत करने के साथ ही पुलिस ने ट्रम्प के राष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण समारोह स्थल से कुछ ही दूरी पर ‘तोड़फोड़’ में शामिल करीब 100 विरोध प्रदर्शनकारियों को शुक्रवार को गिरफ्तार किया.

अपनी आवाज बुलंद करने के लिए सुबह से यहां बडी संख्या में विरोध प्रदर्शनकारी जमा हुए थे और उन्होंने नये प्रशासन की कथित विभाजनकारी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किये. वाशिंगटन के मुख्य इलाके में नकाबपोश विरोध प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच संघर्ष हुए. यह जगह नये राष्ट्रपति के सम्मान में आयोजित सैन्य परेड के रास्ते से थोड़ी ही दूरी पर था. इसे पहले नेशनल प्रेस क्लब के बाहर एक ट्रंप विरोधी प्रदर्शन का आयोजन किया गया जहां पुलिस ने लोगों को तितर-वितर करने के लिए पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया. पुलिस की ओर से मिर्ची स्प्रे का इस्तेमाल किये जाने के साथ कुछ प्रदर्शनकारियों ने भीड़ के बीच में धुएं के गोले छोड़े गये.

प्रदर्शनकारियों ने एक इमारत की दीवार पर प्रोजेक्टर के माध्यम से दो संदेश दिखाया जिनमें से एक में कहा गया है कि ‘क्रूर राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाया जाए.’ एक प्रदर्शनकारी ने ट्रंप स्टाइल की टोपी जलाई. हजारों प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप के विरोध में ‘यूएस कैपिटोल’ की ओर मार्च किया. देसबा रोजास नामक एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘वे श्वेत नस्ली फासीवादी लोग हैं.’ शपथ ग्रहण से पहले प्यू रिसर्च सेंटर ने अपने ताजा सर्वेक्षण में कहा कि अधिकतर लोग मानते हैं कि देश पूरी तरह बंट चुका है. सर्वेक्षण में शामिल 86 फीसदी लोगों ने कहा कि अतीत के मुकाबले आज का अमेरिका राजनीतिक रूप से अधिक बंट चुका है.

ट्रंप को अपनी नीतियां करनी होगी स्‍पष्‍ट! 

चुनाव प्रचार से लेकर शपथ ग्रहण तक डोनाल्‍ड ट्रंप के बोल में कोई खासा बदलाव नहीं आया है. चुनाव प्रचार के दौरान वे जिस आक्रमक ढंग से कुछ मुद्दों को उठाते रहे हैं उनमें प्रमुख मुसलमानों के प्रति उनका नजरिया, प्रवासी, पड़ोसी देशों के साथ संबंध आदि रहे हैं. इस बीच ट्रंप ने एक दो बार अपने भाषणों में केवल अमेरिका के विकास और अमेरिका फर्स्‍ट का नारा बुलंद किया है. बाद में फिर उन्‍होंने अपने पुराने तेवर को ही प्रदर्शित किया है. शुक्रवार को शपथ ग्रहण के बाद अपने संबोधन में भी ट्रंप ने कहा कि वह अमेरिका फर्स्‍ट की नीति पर काम करेंगे.

अमेरिका का पैसा बाहर नहीं जाने देंगे और जिन्‍होंने अपनी नौकरी खोई है उनकी नौकरियां लौटेगी. यहां आपको बता दें कि अमेरिका में काम कर रही कई मल्‍टीनेशनल कंपनियों ने एच1बी वीजा धारकों को काफी संख्‍या में अपनी कंपनी में नौकरी पर रखा हुआ है. अमेरिकियों का आरोप है ये कंपनियां एच1बी वीजाधारकों को कम सैलरी पर नौकरी पर रख लेते हैं और स्‍थानी य अमेरिकियों को नौकरी नहीं मिल पा रही है. ऐसे में ट्रंप ने एच1बी वीजा के नियमों को कड़ा करने के संकेत दिये हैं. आने वाले दिनों में ट्रंप को स्‍पष्‍ट नीतियों के साथ जनता का भरोसा जीतने का प्रयास करना होगा.

ट्रंप की विदेश नीति ‘ताकत के जरिए शांति’ पर आधारित होगी 

व्हाइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में विदेश नीति ‘अमेरिका फर्स्ट’ को सबसे ज्यादा तवज्जो देगी और ‘ताकत के जरिए शांति’ के सिद्धांत पर आधारित होगी. उसने ट्रंप प्रशासन के तहत विदेश नीति का ब्यौरा देते हुए कहा, ‘ताकत के जरिए शांति विदेश नीति का केंद्रबिंदु होगा. यह सिद्धांत दुनिया को स्थित और अधिक शांतिपूर्ण बनाएगा जहां कम टकराव होंगे और अधिक सहमति होगी.’ आईएसआईएस और दूसरे कट्टर इस्लामी आतंकी समूहों की शिनाख्त अपनी ‘सर्वोच्च प्राथमिकता’ के तौर पर करते हुए व्हाइट हाउस ने कहा कि इन समूहों को पराजित और तबाह करने के लिए अमेरिका जरुरत पड़ने पर संयुक्त रूप से और समन्वय के साथ सैन्य अभियान चलायेगा.

पोप फ्रांसिस ने ट्रम्प से गरीबों और परित्यक्तों की मदद करने का किया आह्वान 

पोप फ्रांसिस ने अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने पर ट्रम्प को बधाई देते हुए आज उनसे ऐसे समय में गरीबों के लिए लड़ाई जारी रखने की अपील की जब दुनिया ‘गंभीर मानवीय संकटों’ से जूझ रही है. फ्रांसिस ने नये राष्ट्रपति को शुभकामनाएं दीं और उनके राष्ट्रपति के रूप में कामकाज के लिए उन्हें विवेक और मजबूती मिलने की कामना की. हालांकि उन्होंने ट्रम्प के लिए सावधानीपूर्वक संदेश देते हुए उनसे सबसे वंचित वर्ग की मदद करते रहने की अपील की. इससे भी ट्रंप अपने विरोधियों की धारणा बदलने में कामयाब हो सकते हैं.

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